क्या आपको पता है कि विश्व में अति जनसंख्या के क्या परिणाम निकलेंगे..?

विश्व में अति जनसंख्या के कई गंभीर परिणाम निकलेंगे। विश्व में अपने भू-क्षेत्र से अत्यधिक जनसंख्या वाले देश है। विश्व के सभी देशों में जनसंख्या दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ती जा रही है। यह बढ़ती हुई जनसंख्या निर्धनता,बेकारी खदानों में कमी,कृषि की कमी आदि को बढ़ाती ही है। हर देश में जनसंख्या का घनत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इस प्रकार अधिक जनसंख्या से काफी समस्याएं पैदा हो रही है। विश्व स्तर पर काम कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संगठनों ने बढ़ती जनसंख्या को लेकर अपनी चिंता जताई है

1.निर्धनता:-विश्व के अधिकतर छोटे देशों में निर्धनता अधिक है। लोगों की प्रति व्यक्ति आय कम है। राष्ट्रीय आय में जो प्रतिवर्ष वृद्धि होती भी है। वह भी पहले से अधिक लोगों में बंट जाती है। और इस प्रकार लोगों की प्रति व्यक्ति आय में बहुत कम वृद्धि हो जाती है। जिससे कहीं ना कहीं निर्धनता की समस्या भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी असर डाल रही है।

2. आर्थिक विकास:-किसी देश का आर्थिक विकास बहुत कुछ उस देश में पूंजी निर्माण की दर भी निर्भर करता है। जनसंख्या के अत्यधिक होने और तेजी से बढ़ने के कारण उपभोग खर्च में वृद्धि और बचत में कमी होती है।

3.खाद समस्या:-जनसंख्या के बढ़ने से खाद्य समस्या भी गंभीर होती जा रही है। जनसंख्या की वृद्धि से खदानों की मांग तो बढ़ती है। पर उत्पादन में वृद्धि नहीं हो पाती। जिससे हजारों टन अनाज हर वर्ष विदेशों से मंगवाना पड़ता है।

4. शिक्षा:-बढ़ती जनसंख्या के कारण शिक्षा की सुविधाओं में काफी कठिनाई आई है। पिछड़े व ग्रामीण इलाकों में बढ़ती जनसंख्या के साथ शिक्षा के सुविधाओं को पहुंचाना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

5. सामाजिक कुरीतियां:-बढ़ती जनसंख्या के कारण सामाजिक कुरीतियां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। कीमतों पर नियंत्रण पाना कठिन हो गया है। जिससे गरीब आदमी पिसते जा रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण बाल विवाह,स्त्रियों का शोषण,बलात्कार जैसी घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

 6.प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग:-जनसंख्या तो दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। परंतु प्राकृतिक संसाधन बढ़ती मांगों के कारण दिन-प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग किया जा रहा है। जो कुछ वर्षों बाद खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।

7.वनों की कटाई:-अधिकतर मानव जनसंख्या की बनो पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भरता से वनों की कटाई की जिससे पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न हुआ। मौसम चक्कर पूरी तरह बदल गया है। कहीं पर बारिश हो रही हो कहीं पर अंधाधुंध बारिश हो रही है।

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