गर्भावस्था में देखभाल pregnancy health tips

जब महिला प्रेग्नेंट होती है उसे यही चिंता हमेशा सताती है कि वह अपने 9 महीने कैसे कटेगी और कैसे अपने और अपने बच्चे दोनों का ध्यान रखेंगे आज हम आपको इस बारे में बताएंगे की प्रेगनेंसी में कैसे अपनी देखभाल की जा सकती है कैसे स्वस्थ और हेल्दी प्रेगनेंसी का समय व्यतीत करें और एक हेल्थी बच्चे को जन्म दे सके प्रेगनेंसी के दौरान एक अच्छे डॉक्टर की सलाह ,डायट चार्ट और अच्छी प्रीनेटल चेकअप के कारण महिला एक अच्छे और स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है  तो आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी की शुरुआत कैसे होती है

 

प्रेगनेंसी की शुरुआत ,प्रेगनेंसी कब से काउंट होती है

 
जब कोई भी महिला प्रेग्नेंट होती है तो किसी कभी भी उसे या कंफर्म नहीं होता कि उसकी प्रेगनेंसी कब से रुकी हुई है इसलिए प्रेगनेंसी का अकाउंट उसके आखिरी मासिक के पहले दिन से की जाती है जिसे हम LMP कहते हैं और इससे डॉक्टर बच्चे के जन्म की तारीख का अंदाजा लगाते हैं प्रेगनेंसी टोटल 40 हफ्तों की होती है इसे 280 दिन का माना जाता है

प्रेगनेंसी की शुरुआत

 मां के अंडाशय से निकला हुआ अंडा  पिता के शुक्राणुओं के साथ निषेचित होता है उस प्रक्रियाको  फर्टिलाइजेशन  कहते है उसके बाद ही मा गर्भधारण करती है जब यह निषेचित अंडा इंप्लांट हो जाता है यानी कि गर्भाशय के साथ चिपक जाता है उसके बाद ही प्रेगनेंसी की शुरुआत होती है
 
एक बार  जब प्रेगनेसी की पुष्टि हो जाती हैं तब महिला को अपना विशेष कर ध्यान रखना होता है उसे अच्छे से चेकअप करवाना होता है सभी प्रकार के विटामिन, आयरन , calcium सप्लीमेंट लेने होते हैं  प्रॉपर वैक्सीनेशन करानी होती है जिसके दौरान ही वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं अगर प्रेगनेंसी  में किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं होती तो वह अपनी नॉर्मल  डिलीवरी करवा सकती हैं और यदि नॉर्मल डिलीवरी संभव ना हो तो यानी कि  गर्भ सही ढंग से धारण ना किया हो तो सी सेक्शन से डिलीवरी कराई जाती है
चलिए प्रेग्नेंसी के बारे में विस्तार पूर्वक जाने

प्रे्नेंसी की पहली तिमाही pregnancy ki pahli timahi

प्रेगनेंसी के पहले तिमाही की शुरुवात 1 से 12 हफ्तों की होती है पर इस दौरान कुछ महिला को यह पता ही नहीं चलता कि वह प्रेग्नेंट है 5 से 7 हफ्तों तक महिला को यह पता नहीं चल पाता ऐसा इसलिए होता है कि कई महिलाओं में लक्षण बहुत देरी से उत्पन्न होते हैं और पीरियड मिस हो जाने के बाद भी कई महिलाएं इसे कुछ दिनों तक अनदेखा कर देती हैं प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में गर्भपात होने के बहुत ज्यादा आशंका होती है इस समय महिला को अपना विशेष ध्यान रखना होता है
 प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में महिला का वजन घट जाता है क्योंकि इस समय उसे जी मिचलाना उल्टी आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है
 इस समय महिला के शरीर में शारीरिक और हार्मोन बदलाव हो रहे होते हैं
 रक्त की अवधि भी तेज हो जाती है क्योंकि समय शिशु बन रहा होता है
 प्रेग्नेंसी के पहली तिमाही के आखिरी हफ्ते तक शिशु की धड़कन भी सुनाई देती है
 इस समय शिशु की अंग विकसित होने लग जाते हैं जैसे कि स्पाइनल कॉर्ड मस्तिष्क आदि
प्रेगनेंसी के  पहले तिमाही में ही बच्चे की गर्भनाल विकसित होना शुरू हो जाती है जहां से बच्चे को सभी प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही pregnancy ki dusri timahi

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही यानी कि 13से  27 हफ्तों की होती है इस दौरान गर्भाशय में पल रहा शिशु बड़ा हो जाता है इस समय तक वह हिल डुल रहा होता है और महिला को यहां महसूस होने लगता है कि उसके गर्भाशय में कुछ पल रहा है 
 
दूसरी तिमाही के दौरान महिला को प्रीनेटल चेकअप करवाने चाहिए जिससे यह पता चल जाए कि गर्भावस्था में पल रहा शिशु सही है या नहीं उसमें कोई जन्म जात विकार तो नहीं है 
 
18 से 20 हफ्तों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा कहते हैं जिससे प्रेगनेंसी में होने वाली जटिलताओं का पता लगाया जा सकता है तथा उन्हें अभी से दूर किया जा सकता है 
और यदि एक से अधिक शिशु गर्भ में पल रहे हो तो इसके लिए इसका पता दूसरी तिमाही में ही चल जाता है
 
प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान ही मां अपने बच्चे को महसूस कर सकती हैं तथा उससे जुड़ी हुई उसे सभी प्रकार की गतिविधियों का अहसास होने लगता है प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही सैफ होती हैं इसलिए इस समय मां को अधिक चिंता और तनाव में  नहीं रहना चाहिए

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही pregnancy ki tisri timahi 

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही यानी कि 28 से 40 हफ्तों की होती है इस दौरान शिशु पूरी तरह से बन गया होता है वह अच्छे से अपनी हलचल कर सकता है इस दौरान मां को अपना और विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस समय बच्चे की हड्डियां नाजुक होती है
तीसरी तिमाही के दौरान बच्चा रोशनी को महसूस कर सकता है वह अपनी आंखें खुली और बंद कर सकता है वह बाहरी आवाजों को सुन सकता है
 तीसरी तिमाही के दौरान मां को और अधिक थकान महसूस होती है क्योंकि इस समय गर्भाशय का आकार पूरी तरह से बढ़ गया होता है और इस दौरान मां को कभी-कभी सांस लेने में प्रॉब्लम ,सांस फूलना आदि जैसी समस्याएं हो सकती है इसलिए इस समय तक मां को आराम करना चाहिए 
यदि सबकुछ सही रहा तो प्रेगनेंसी की  तीसरी तिमाही के अंत तक मां नॉर्मल डिलीवरी से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं

प्रेगनेंसी केयर टिप्स (गर्भावस्था देखभाल)

रूटीन चेकअप और अच्छे डॉक्टर से सलाह

 प्रेगनेंसी की पुष्टि होने के बाद ही आपको रुटीन चेकअप कराने की सलाह दी जाती है और  प्रेगनेंसी में एक अच्छे डॉक्टर की सलाह लेने बहुत ही जरूरी होती हैं  जिसमें डॉक्टर शुरुआत में ही महिला के टेस्ट करवाते हैं जिनमें ब्लड ( खून) टेस्ट ,यूरिन टेस्ट और एचआईवी टेस्ट आदि सभी प्रकार के टेस्ट होते हैं जिससे यह पता चलता है कि बच्चे में किसी भी प्रकार की अनुवांशिकता की प्रॉब्लम तो नहीं है और डॉक्टर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के अंत में अल्ट्रासाउंड भी करवाते हैं जिससे यह पता लगता है की बच्चे की धड़कन सही प्रकार से है या नहीं प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर चेक अप करते हैं यदि किसी भी प्रकार समस्या हो तो उसका उसी समय इलाज किया जाए
 
प्रेग्नेंसी डायट प्लान

 

 
जब भी महिला प्रेगनेंट होती है तो उसे अपना एक डाइट प्लान बना लेना चाहिए जिसमें वह सभी प्रकार का संतुलित भोजन खा सके जिससे वह स्वयं को और अपने आने वाले बच्चे को अच्छी प्रकार से विकसित कर सके यदि महिला का भोजन ही सही नहीं होगा तो बच्चे में कई प्रकार से विकार उत्पन्न हो सकते हैं इसलिए महिला को एक प्रकार से संतुलित भोजन खाना चाहिए जिसमें सभी प्रकार के    विटामिन आयरन आदि आदि पर्याप्त मात्रा में हो
प्रे्नेंसी के दौरान मां को दूध दही का प्रयोग करना चाहिए जिससे कि बच्चे की हड्डियां मजबूत हो और उसे हड्डियों का अच्छी प्रकार से विकास हो
प्रेगनेंसी के दौरान मां को आयरन से भरपूर मात्रा में बना हुआ भोजन खाना चाहिए जिससे मां को किसी भी प्रकार की खून की कमी ना हो क्योंकि यदि मां को खून की कमी होगी तो यह विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न कर सकता है
प्रेगनेंसी के दौरान मां को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए क्योंकि यदि मां हाइड्रेटेड नहीं रहेगी तो उसे चक्कर आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है हाइड्रेटेड रहना मा को नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार करता है

गर्भावस्था के दौरान वैक्सीनेशन करवाना

हर महिला को गर्भावस्था के दौरान वैक्सीनेशन करवाना जरूरी होता है इसलिए प्रेगनेसी की पुष्टि होने के बाद अपने नजदीकी हॉस्पिटल जाए और वैक्सीनेशन करवाए इससे बच्चे को फ्यूचर में आने वाली समस्याओं से बचाया जा सकता है

गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज करना

हर महिला को अपने गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज करनी चाहिए परंतु किसी भी प्रकार के भारी समान को नहीं उठाना चाहिए और हमेशा एक्सरसाइज डॉक्टर की सलाह से ही करनी चाहिए 

ब्रीदिंग एक्सरसाइज breathing exercises

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही तक गर्भाशय का आकार पूरी तरह से बढ़ जाता है जो कि फेफड़ों पर दबाव डालता है जिसके कारण महिला को सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना जैसी समस्या होती है इसलिए समय महिला को breathing एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है महिला को सुबह 1 घंटे हरी घास पर बेठकर एक्सरसाइज करने को कहा जाता हैं

पेरीनियल एक्सरसाइज perineal exercise

इस एक्सरसाइज को करने की सलाह डॉक्टर तब देते हैं जब प्रेगनेंसी का अंत होता है तो महिला को नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार किया जाता है जिसमें महिला को बटरफ्लाई पोस्शन में बैठकर या पैरों के भार बैठकर एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है

अच्छी आदतें अपनाए

गर्भावस्था के दौरान मां को अच्छी आदतें अपनाने चाहिए गर्भावस्था के दौरान शराब और सिगरेट का सेवन नहीं चाहिए यदि मा गर्भावस्था के दौरान  शराब का सेवन करती है तो अल्कोहल मा की रक्त कोशिका से बच्चे की रक्त कोशिकाओं में पहुंच जाता है जिससे बच्चे को फेटल अल्कोहल सेंड्रोम हो सकता हैं और अल्कोहल बच्चे तक पहुंचने वाले ऑक्सीजन  प्रभाव को भी प्रभावित करती है इसलिए मां को अपने 9 महीने की प्रेगनेंसी के दौरान शराब का सेवन नहीं करना चाहिए

अच्छी और पर्याप्त मात्रा में नींद ले

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अच्छी नींद लेनी चाहिए इस दौरान महिला को कम से कम रात में 6से  8 घंटे तक सोना चाहिए और दिन में 1 से 2 घंटे तक सोना चाहिए इससे मां के शरीर को आराम मिलता है उसे थकान कम होती है और गर्भ में पल रहा शिशु भी अच्छी प्रकार से विकसित होता है

तनाव से दूर रहना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बिल्कुल भी नहीं लेना चाहिए क्योंकि इस दौरान यदि महिला किसी भी प्रकार के तनाव में रहेगी तो इससे मां के शरीर में हार्मोनल बदलाव होंगे जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में समस्या उत्पन्न हो सकती है

सही पोस्चर में सोना चाहिए

जैसे-जैसे प्रेगनेंसी बढ़ती है वैसे वैसे मां को सोने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इसलिए प्रेगनेसी के दौरान मां को बार करवट लेकर सोना चाहिए प्लेसेंटा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व जाते हैं जो कि शिशु को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं इसलिए मां को हमेशा बाई करवट में होना चाहिए मां को अधिकतम पीठ के बल नहीं सोना  चाहिए इससे पीठ में दर्द होने जैसी समस्या तथा सांस लेने में दिक्कत होने की समस्या हो सकती है

प्रेगनेंसी के दौरान मां को किसी भी प्रकार का भारी वजन नहीं उठाना चाहिए ना ही पानी से भरी  बाल्टी या उठाने चाहिए

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