शारीरिक गर्मी को कम करने के रामबाण घरेलू नुस्खे, आगे पढें

गर्मी के मौसम में हमारा शरीर का ताप भी बढ़ जाता है। लेकिन कई बार हमें सर्दी के मौसम में गर्मी या जलन महसूस होती है। शरीर के ताप को कम करने के लिए हम बहुत से उपाय करते हैं परंतु शरीर अंदर से गर्म ही रहता है और शरीरर के अंदर जलन सी महसूस होती है। इस जल्द को कम करने के लिए हम आपको कुछ रामबाण घरेलू नुस्खे बताएंगे। जिससे आपकी शरीर के अंदर की गर्मी शांत हो जाएगी।

नींबू, संतरे जैसे फलों में विटामिन सी पाया जाता है। इस चाहें ऐसे ही खायें या फिर शर्बत बनाकर पीएं इसका फायदा आपको मिलता है। फल और हरी सब्जियां वैसे भी गर्मियों में खाने की सलाह दी जाती है इनमें बड़ा मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो शरीर की गर्मी को दूर करने में मदद करता है।

गर्मियों में खास तर पर ज्यादा तेल व मसालेदार भोजन करना अवॉइड करें। इससे आपका पेट भी ठंडा रहेगा और आपका शरीर भी। वसा और कैफीन वाली चीजें खाने पीने से भी बचना चाहिए। ये सभी चीजें शरीर में गर्मी को बढ़ाते हैं।

ग्लूकोस के पानी का दिन में दो तीन बार सेवन करें। ग्लूकोस भी शरीर के अंदर की गर्मी को खत्म करके ठंडक देता है।

नारियल का पानी भी शारीरिक गर्मी को शांत करता है और शारीरिक जलन को भी कम कर देता है।

कूल वॉटर शारीरिक गर्मी को कम करने का पहला तरीका पानी है। यह उच्च तापमान के दुष्प्रभावों से जल्दी से ठीक होने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से बहुत सारा पानी पीएं अधिमान्यता ठंडा पानी का गिलास। आप पानी के एक टब में कुछ बर्फ क्यूब्स भी जोड़ सकते हैं और शरीर की गर्मी को कम करने के लिए अपने पैरों को विसर्जित कर सकते हैं।

 

प्याज में शरीर को गर्म करने का गुण होता है। इसके अलावा इससे हार्मोनल इम्बैलेंस भी आता है। प्याज में काफी ज्यादा मात्रा में गर्मी होती है। अगर आप इसे अंडरआर्म में दबाकर रखेंगे तो भी शरीर का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि फीवर का एहसास होने लगेगा। इसलिए अगर आपको गर्मी से प्रॉब्लम है तो प्याज से दूर रहें। प्याज की तरह लहसुन खाने से भी गर्मियों में हार्मोनल इम्बैलेंस का खतरा रहता है। ऐसे में लहसुन को ज्‍यादा मात्रा में नहीं खाएं। अगर आपको शरीर में गर्मी की समस्या ज्यादा है तो तले हुए पदार्थ यानी मिठाइयों आदि से दूर है। अगर संभव हो सके तो नजदीकी क्लीनिक पर जाकर डॉक्टर को अपनी समस्या जरूर बताएं। क्योंकि हम अक्सर ऐसी छोटी-छोटी बीमारियों पर विशेष ध्यान नहीं देते जिसके कारण ये बीमारियां आगे चलकर हमारी परेशानी का कारण बनती है।

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